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Thursday, 24 April 2008

अगर कोई मुमताज होती

बजा तो हम भी सकते थे गर साज होते "
गा तो हम भी सकते थे गर आवज होती "
कौन कहता है शाहजँहा ने बनवया था ताजमहल "
बनवा तो हम भी सकते थे अगर कोई मुमताज होती "

Thursday, 17 April 2008

मेरे दील मे समायी है

तु मेरे दील मे कुछ इस तरह समायी है ""
जैसे बाजरे के खेत मे भैस घुस आयी है "

Monday, 7 April 2008

रस परिवर्तन

जब प्रेमी ,प्रेमिका चाँदनी रात मे मिले ,तो श्रृंगार रस का हास्य रस मे
परिवर्तन देखिये ""
प्रेमी ने कहा ,देखो ये पुनम का चाँद हमसे क्या कह रहा है "
प्रेमिका ने कहा ,चल हट पगले तेरा नाक बह रहा है

Tuesday, 1 April 2008

वह तो बिसाती है

ना वह अक्लमन्द है ,
ना वह पाबन्द है !!
वह तो बिसाती है
मगर रौब ऐसा है कि हिटलर का नाती है ""

बिसाती = मुर्ख