
भई ! सस्ते शेर लिखते लिखते सोचा क्यो न आज एक सस्ती त्रिवेणी लिखी जाए तो पेले खिदमत है जयपुर के चांदपॉल बाज़ार में मिलने वाली सस्ती त्रिवेणी ....
तेरे भाइयो ने मुझे ऐसे पीटा
जैसे हू मैं कोई कच्छा धारीदार
बस धोया भिगोया और हो गया..
महंगाई के दौर में एक राहत की सांस

बोला दुकानदार कि क्या चाहिये तुम्हे
जो भी कहोगे मेरी दुकाँ पर वो पाओगे
मैनें कहा कि कुत्ते के खाने का केक है
बोला यहीं पे खाओगे या ले के जाओगे
बहुत ही सस्ता शेर .....किसी ट्रक के पीछे लिखा था
गाड़ी चलाने से पहले हैंडिल देख लेना
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गाड़ी चलाने से पहले हैंडिल देख लेना
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लड़की छेड़ने से पहले सैंडिल देख लेना


वो मेल करें चाहे न करें हम आस लगाए रहते हैं
इतना तो बता दे कोई हमें, क्या ..........
मेलबॉक्स हमारा खाली है
हम जानते तो है हाय मगर
जब तक नेट कनेक्ट न हो जाए
हम माथा पीटते रहते हैं
