तेरी याद आज भी रह रह कर कुछ इस तरह आ जाती है
कि जैसे म्युनिसपलटी के बन्द पड़े नल से
कभी कभी पानी की बूँद अनायास टपक जाती है ।
अनूप भार्गव
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Friday, 28 March 2008
Tuesday, 25 March 2008
या नया कोई तमाशा है ...
अर्ज़ किया है :
वो मैय्यत पे मेरी आये और झुक के कान में बोले
सचमुच मर गये हो या नया कोई तमाशा है .........
अनूप भार्गव
वो मैय्यत पे मेरी आये और झुक के कान में बोले
सचमुच मर गये हो या नया कोई तमाशा है .........
अनूप भार्गव
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