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Saturday, 29 March 2008

इज़हार-ए-मोहब्बत

कई बरस पहले एक दोस्त ने मोहन मीकिन्स कम्पनी की एक डायरी गिफ़्ट की थी। उस में एक उम्दा सस्ता शेर था। मुझे हैरत है वह अब तक यहां कैसे नहीं पहुंचा:

इज़हार-ए-मोहब्बत पे वो मरम्मत हुई मेरी

पहले था मेरे दिल में, अब घुटने में दर्द है.