महफिल में एक शेर अर्ज़ है.दो पैग पीने के बाद.
हम को भी रम ने मारा , तुम को भी रम ने मारा
हम को भी रम ने मारा , तुम को भी रम ने मारा
हम को भी रम ने मारा , तुम को भी रम ने मारा
आओ ये पव्वा खतम कर, हम रम को मार डालें
Showing posts with label मयख़ाना. Show all posts
Showing posts with label मयख़ाना. Show all posts
Monday, 31 March 2008
Subscribe to:
Posts (Atom)
