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Tuesday, 25 March 2008

welcome to मयखाना !!


कह दो को कि हम नहीं हैं यहाँ ये हमने बोल रक्खा है ,
' ये भी बताओ साथ में के मैखाना खोल रक्खा है !

Thursday, 28 February 2008

तरदामनी पर शेख हमारी न जाइए

बहुत सालों के बाद पिछले दिनों पत्रकार मित्र श्रीप्रकाश टकरा गए दिल्ली में। उन की मारफ़त एक जबरजस्त सेर आया है। सो पहला शुक्रिया उन का। एक शुक्रिया उन साहेब के वास्ते ड्यू है जो इस महान कविता के मूल रचनाकार का नाम-पता मुहैय्या कराएगा।

तरदामनी पर शेख़ हमारी न जाइयो
दामन निचोड़ दें तो फ़रिश्ते वज़ू करें