बहुत सालों के बाद पिछले दिनों पत्रकार मित्र श्रीप्रकाश टकरा गए दिल्ली में। उन की मारफ़त एक जबरजस्त सेर आया है। सो पहला शुक्रिया उन का। एक शुक्रिया उन साहेब के वास्ते ड्यू है जो इस महान कविता के मूल रचनाकार का नाम-पता मुहैय्या कराएगा।
तरदामनी पर शेख़ हमारी न जाइयो
दामन निचोड़ दें तो फ़रिश्ते वज़ू करें
Showing posts with label श्रीप्रकाश. Show all posts
Showing posts with label श्रीप्रकाश. Show all posts
Thursday, 28 February 2008
Subscribe to:
Posts (Atom)
