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Sunday, 12 April 2009

ऐसे वैसे कैसे



कैसे कैसे ऐसे वैसे हो गए
ऐसे वैसे कैसे कैसे हो गए

Sunday, 8 June 2008

कमबखत बादल छाए हैं


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आज बारिश का शेर ।।

वाह वाह भाय बादल छाए हैं ।
वाह वाह भाय बादल छाए हैं ।
वाह वाह भाय बादल छाए हैं ।
अबे चुप कमबखत चेक कर
हमने अपने छाते सिलवाए हैं ।

Thursday, 1 May 2008

थियोरी ऑफ रिलेटिविटी का तीसरा शेर


अभी तक आपने थियोरी आफ रिलेटिविटी के दो शेर सुने ।
आइंस्‍टीन ने थियोरी ऑफ रिलेटिविटी यानी सापेक्षता का सिद्धान्‍त
किन अवलोकनों के सहारे दिया था, हम नहीं जानते ।
लेकिन थियोरी ऑफ रिलेटिविटी की वैज्ञानिक शायरी करते हुए
'रेडुआई शेर' को मज़ा आ रहा है ।
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मिलो ना तुम तो हम घबराएं, मिलो तो आंख चुराएं ।
मिलो जो तुम तो भी घबराएं तो भी आंख चुराएं ।।
हमें क्‍या हो गया है ।।
अरे क्‍या हो गया है ।।

*चित्र साभार : www.artists.org से ।

Wednesday, 30 April 2008

थियोरी ऑफ रिलेटिविटी का दूसरा शेर


कल मैंने थियोरी ऑफ रिलेटिविटी का पहला शेर अर्ज़ किया था ।

आज
अर्ज है
थियोरी ऑफ रिलेटिविटी
का
दूसरा
शेर
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सड़क पर दूर से देखा तो थूक नज़र आ रहा था
और पास जाकर देखा तो कमबखत थूक ही था ।
छी छी छी ।

Tuesday, 29 April 2008

थियोरी ऑफ रिलेटिविटी का शेर


मैदान से देखा तो खिड़की पर कोई नहीं था
खिड़की से देखा तो मैदान में कोई नहीं था ।
कमबख्‍त चक्‍कर क्‍या था ।
कहीं कोई था या कहीं कोई नहीं था । हंय ।।

Tuesday, 25 September 2007

अर्ज किया है भैया




तुम्हारी याद में बेचैन उसको रात भर रखा
कभी तकिया इधर रखा कभी तकिया उधर रखा ।।



Thursday, 13 September 2007

हिमाकत,सदावत,अदावत,हरारत


हिमाकत,सदावत,अदावत,हरारत
शरारत,लताफत,रफ़ाक़त,सलामत
रहमत, अज्‍मत,उल्‍फत, ज़ेहमत
किस्‍मत,जनमत,गम्‍मत,जम्‍मत
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आप भी कितने अच्‍छे हो
शेर के नाम पे कुछ भी पेल दो
पढ़ने चले आते हो ।

Wednesday, 12 September 2007

सबेरे का सूरज




सबेरे का सूरज तुम्‍हारे लिए है, तुम जाग जाना
मैं नौ बजे तक सोऊंगा, मुझे ना जगाना