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Tuesday, 24 June 2008

सस्ती रातें

मैने आज ही ये सस्ती सी तुकबन्दी की लेकिन ये इतना छोटा सा शेर बना कि इसे पढ़वाने से पहले मुझे समझाना पड़ रहा है। आजकल मंहगाई कुछ ज्यादा ही बढ़ गयी है, दिन में आफिस जाओ तो गैस (पैट्रोल) का खर्च, दिन में ही दुकानें खुली रहती है इसलिये कभी ये लो कभी वो, अलग-अलग तरह के खर्च। रात होने पर इस तरह की चीजों की चिंता नही। इसलिये अर्ज किया है -

सस्ते शेर, सस्ती बातें
मंहगें दिन, सस्ती रातें।


इस शेर से पहले, मैं शब्दों के साथ कुछ और लिखने के लिये हाथापाई कर रहा था। थोड़ी सी धीकामुस्ती के बाद शब्दों को जब ठेला तो वो कुछ इस तरह से इकट्ठे हो गये (खाने की टेबल पर लेट पहुँचने वाले सभी मर्दों को समर्पित) -

तुस्सी ग्रेट हो जी,
कोरी एक स्लेट हो जी,
जल्दी से प्लेट लाओ
खाने में लेट हो जी।

Friday, 20 June 2008

चंद शब्द चुनकर लाया हूँ

सस्ते शेर के सस्ते श्रोताओं को एक सस्ता सा सलाम, इस कलाम की कहानी कुछ वैसी ही है जैसी 'तिल बना रहे थे, स्याही फैल गयी' की। मुलाहयजा फरमायें -

शेर तुम, गजल तुम, गीत और कविता भी तुम
चंद शब्द चुनके लाया था, जाने कहाँ वो हो गये गुम।

कोई आंखों पे गुनगुनाता है, कोई मंदिर में जा सुनाता है
'तरूण' ये सुखनवरों की बस्ती है, यहाँ हर शब्द दिल को भाता है।

चलो तुम मीर बन जाओ, गालिब का तख्ल्लुस मैं ले लूँ
शब्दों के फूल तुम चुनो, और मैं उन से माला बुन लूँ।

ऊपर की इन लाईनों को आज छापने से पहले थोड़ा दुरस्त किया गया है, वैसे ये कई हफ्तों से किसी लावारिस पेपर में लिखी घर के किसी कोने में पड़ी थी, आज नजर गयी तो जैसे इनको भी इनका खोया चांद मिल गया। दुरस्त करने से पहले का ड्राफ्ट वर्जन कुछ ऐसे था -

शेर तुम, गजल तुम, गीत और कविता भी तुम
बहुतों ने करी कोशिश, सीधी ना कर पाये कुत्ते की दुम।

कोई आंखों पे गुनगुनाता है, कोई मंदिर में जा सुनाता है
'तरूण' ये सुखनवरों की बस्ती है, आ तू भी अपना आशियाँ यहाँ बुन।

चलो तुम मीर बन जाओ, गालिब का तख्ल्लुस मैं ले लूँ
सस्ते शेरों की ये दुनिया सही, यहाँ शायर कभी नही होते गुम।

Friday, 4 April 2008

भंसाली, साँवरिया और...

ये फिल्म भले ही पिट गयी हो लेकिन इसके गीत सुनने में ठीक ठाक रहे। इस फिल्म को फैमली फिल्म बनाने के लिये भंसाली को एक सीन काटने पर सहमत होना पड़ा था जिसमें फिल्म के नौजवान हीरो का तौलिया गिर जाता है। उसी सीन के ऊपर हमने ये दो लाईन लिखीं, भंसाली हमसे पहले मिले होते तो शायद फिल्म उस सीन के साथ फैमिली सार्टिफिकेट लेकर पास होती। मुलाहिजा फरमाईये -

भंसाली ने रणवीर से, साँवरिया में डाँस करवाया
नया नया छोरा था, तौलिया संभाल नही पाया।

Sunday, 2 March 2008

अभी मन ना है

हमारी भाषा अलग थी और शब्द जुदा लेकिन बात हम एक ही कर रहे थे, आप जिन्हें सस्ता शेर कह रहे थे उन्हें हमने जेनेरिक शेर नाम दिया हुआ था। एक शेर दूसरे शेर से कब तक जुदा रहता जिस दिन हमें वो दूसरा शेर नजर आया हमने हाथ मिलाने का निमंत्रण कुछ यूँ माँगा -

हमें भी इस सस्ती महफिल का सितारा बनना है
7 से ज्यादा शेर भेजते, लेकिन अभी मन ना है।


अब हम खुद तो हाथ भी नही लगाते लेकिन पिये और पीने वालों पर लिखने से परहेज बिल्कुल नही करते, ये बानगी देखिये -

नशे को कर बुलंद इतना कि हर पैग से पहले,
शराबी शराब से ये पूछे, बता तूझमें इतना मजा क्यों है।

अब देश में महिलाओं को कितनी आजादी है ये तो पता नही लेकिन टीवी सीरियलों में देखें तो बस वो ही वो हैं,

पति के बोलने के हम नही कायल,
जब सास-ससूर को नही बख्शा तो ये बहू क्या है।

और अपना लिटिल ड्रैगन अपने से भी दो हाथ आगे है, देखिये कैसे नयी चीज मांगता है -

नये कपड़े लेने का, मेरे बेटे ने, निराला ढंग निकाला है।
अपनी मम्मी से पूछता है, उसका पैजामा किसने फाड़ डाला है।

आज के लिये बस इतना ही।

Friday, 29 February 2008

धरती तारे, पहाड़, पत्थर

मनीषा के आंसू मुझ से देखे ना गये ;) इसलिये कल जिन ३ शेरों का जिक्र उन्होंने किया वो उनकी तरफ से मानिये और उन ३ शेरों की कमी पूरी करने के लिये अपनी सस्ती डायरी के रद्दी के पन्नों से उतारे ये ३ शेर अर्ज है। हाँ, हाँ मुझे मालूम है ये कुछ ज्यादा ही सस्ते हैं लेकिन अभी अभी मुनीश ने मंहगाई मार गयी गाया था उसका असर थोड़ी देर तो रहेगा ना।

धरती तारे, पहाड़, पत्थर
धरती तारे, पहाड़, पत्थर
इकहत्तर, बहत्तर, चौहत्तर।
(तिहत्तर का मत सोचिये वो छुट्टी पर है)

जिसे दिल दिया वो दिल्ली चली गयी
जिसे प्यार किया वो इटली चली गयी।
दिल ने कहा, खुदकुशी कर ले जालिम
बिजली को हाथ लगाया तो बिजली चली गयी।

दिल को पता था वो जरूर आयेगी
दिल को पता था वो जरूर आयेगी
पर कभी सोचा ना था जब आयेगी
अपना बॉयफ्रैंड^ भी साथ लायेगी।

^हसबैंड भी पढ़ सकते हैं।

Thursday, 28 February 2008

इधर खुदा है, उधर खुदा है

सस्ते शेरों की इस महफिल में निठल्ले का सलाम, अब ज्यादा दुआ सलाम ना करते हुए सीधे अर्ज किया है -

तुम्हारा चेहरा मोती समान, तुम्हारा चेहरा मोती समान
मोती हमारे कुत्ते का नाम।

इधर खुदा है, उधर खुदा है, जिधर देखो उधर खुदा है
इधर-उधर बस खुदा ही खुदा है,
जिधर नही खुदा है, उधर कल खुदेगा।

तुमको देखा, तुमको देखा तो ये ख्याल आया
पागलों के स्टॉक में एक नया माल आया।

तू मेरे दिल में ऐसे समायी है
जैसे बाजरे के खेत में भैंस घुस आयी है।