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Tuesday, 27 November 2007

फ्रस्ट्रेशन

जहर खाया अजीज हो।
पर जहर भी दवा हुयी॥
पंखा दहेज़ मी मिला।
तो बीबी हवा हुयी।

Wednesday, 21 November 2007

हकिकत


होठ तेरे जैसे गुलाब,
मदिरा से भरा जाम था।
सुन्घा वो गुलाब तौबा तौबा
वो तो क्लोरोफ़ार्म था...

Tuesday, 20 November 2007

सार्वजनिक टायलेट शेर

फ़ुल है गुलाब का चमेली का मत समझना।
आशिक हु आपका सहेली का मत समझना॥

लाईनमारु शेर

तेरे नयनो कि ब्यूटी ने मुझे एट्रक्ट किया।
औरो को रिजेक्ट किया, बस तुझे ही सेलेक्ट किया॥
तुझसे रिक्वेस्ट है कि रिफ़्युज ना करना।
मेरे मोहब्बत के बल्ब को फ़्युज ना करना..

Sunday, 28 October 2007

हमने तो उनकी याद में ज़िंदगी गुज़ार दी,


हमने तो उनकी याद में ज़िंदगी गुज़ार दी,


हमने तो उनकी याद में ज़िंदगी गुज़ार दी,

हमने तो उनकी याद में ज़िंदगी गुज़ार दी,


वो फिर नहीं आये जिन्हें कुल्फ़ी उधार दी!