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Sunday, 11 January 2009

बकबक

बहुत दिन से सुन रहां हूं सस्ते शेर,
आपकी बकबक, इनकी बकबक ,उनकी बकबक।
बर्दाश्त की हो गई है हद,खामोश हो जा ,या
और बक ,खूब बक , मेरी बला से करेजा बकबक।

Monday, 5 May 2008

कलजुग में दारू मिली

रामजनम मे दूध मिला ,कृषण जनम मे घी /
कलजुग मे दारू मिला सोच समझ कर पी //

Sunday, 9 March 2008

दुल्हन वही

दुल्हन वही जो पिया मन भाए/

बीवी वही जो कमा कर लाए//

अब्बा बना गई

टूटे हुए दिल को मुरब्बा बना गई , घर को मेरे कचरे का डब्बा बना गई /

शादी को अभी तीन महीने भी नही गुजरे , ना जाने किस हिसाब से अब्बा बना गई /

Wednesday, 19 December 2007

शेर

शेर सुनने मे मजा आता है /शेर कहने मे मजा आता है /
शेर सामने आये तो फिर दौड़ने मे मजा आता है //

Monday, 26 November 2007

अकल से मोटा

अकल से मोटा हमारा चाम होना चाहिऐ /
हो भले थू- थू मगर कुछ नाम होना चाहिऐ //
प्यार करने के लिए काफी कलेजा ही नही /
बाप से बेटा तनिक बदनाम होना चाहिऐ //

Wednesday, 24 October 2007

पी शराब तो

पी रात भर शराब तो रात कट गई /

सुबह किया हिसाब तो पेंट फट गई //

Sunday, 14 October 2007

मुझे जला देना या

मुझे जला देना या दफना देना ,
मरते समय एक घूंट रम पिला देना /

मै ताजमहल नही मांगता यारो ,
मेरी कब्र पर एक गर्ल्स होस्टल खुलवा देना
//

Saturday, 13 October 2007

हू फ़िदा

ग़र गधी के कान में कह दूं कि तुझ पर हूं फ़िदा /

है यकीं मुझको कि वोह भी घास खाना छोड़ दे
//

Friday, 12 October 2007

eed ka chand

ईद के चांद का क्या देखा देखा ना देखा /
तुम्ही नकाब उठा दो के ईद हो जाये //

Saturday, 6 October 2007

kamar hi nahi he

लोग कहते हें उनके कमर ही नही हे /

तो फिर वो कमरबंद कँहा बांधते हे /

Friday, 5 October 2007

ऋतू बीत ना जाये सावन की

हे अष्ठपुत्री सौभाग्यावती ना सोचो नैहर जावन की
दिल मे उमंग अब भी मेरे, हो भले उमरिया बावन की

अब तो हो सजनी लूप्वती चिन्ता ना किसी के आवन की
सारा आसाढ़ यूं ही बीता ऋतु बीत ना जाये सावन की

माशूक मेरा गंजा है


कौन कहता है कि माशूक मेरा गंजा है
चांद के सिर पे कहीँ बाल हुआ करते हैं

हम घर में घुस जायें!


ख़ुदा करे इन हसीनों के मां-बाप मर जायें,
बहाना मौत का हो और हम घर में घुस जायें!

तेल लगाके चल दिये


वो आये हमारी क़ब्र पे, दिया बुझाके चल दिये!
दिये में जो तेल था, वो सिर में लगा के चल दिये!!

एक ही बोतल है



पीता नही हूँ इसलिये मस्जिद मे बैठकर
एक बोतल है कहीं मुल्ला ना छीन ले ।

किसकी मजाल है



किसकी मजाल है जो रोके दिलेर को
यूं तो गर्दिश मे कुत्ते भी घेर लेते है शेर
को

Wednesday, 3 October 2007

उट्ठे नहीं लेट गये...


हज़रते बूम जहां बेठ गये, बेठ गये
जूतियां लाख पड़ीं, उट्ठे नहीं लेट गये

पैंट ख़राब हो जाती है...


शेर कहना कोई आसान नहीं है ऐ दोस्त,
पैंट ख़राब हो जाती है, जब शेर निकल आता है.

करते हाय-हाय चलो


जनाज़ेवालों न जल्दी क़दम बढाए चलो,
उसी का कुंचा है कुछ करते हाय-हाय चलो,