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Friday, 24 July 2009

दिलों से खेलने का हुनर हम नहीं जानते

दिलों से खेलने का हुनर हम नहीं जानते
इसलिये इनकी बाज़ी हम हार गये,
मेरी ज़िन्दगी से शायद उन्हें बहुत प्यार था
इसीलिये मुझे ज़िन्दा ही मार गये,

Friday, 2 May 2008

न जाने किस गली में ...


मोहब्बत हो गई है डाकु सुल्ताना की बेटी से
न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाये ।

Monday, 3 March 2008

न ये ज़मीं के लिये है न आसमाँ के लिये

ये ज़मीं के लिये है आसमाँ के लिये

ये मकीं के लिये है मेहरबाँ के लिये

ये और बात, लपेटे में कोई जाए

बना है पोटा, तजम्मुल हुसेन ख़ाँ के लिये.