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Wednesday, 22 April 2009

पव्वा संबन्धी शेर


ज़माने से न दब ग़ालिब तू उसके लिए हो जा हऊवा

खीसे को कर ज़रा ढीला, हलक से उतर ले पव्वा !!

Tuesday, 14 April 2009

बाइक सम्बन्धी शेर






मुद्द- आ है कमबखत ये अपनी-अपनी लाइकिंग का



बुरा है पै क्या कीजे इस शौक़ ऐ अज़ीम बाइकिंग का

Sunday, 12 April 2009

एक बार फ़िर


मेरे शुरुआती शेर रोमन स्क्रिप्ट में हैं चूंकि तब हिन्दी टाइप के जुगाड़ से खाकसार वाकिफ़ न था (अभी भी 'खाक ' के नीचे नुक्ता कैसे बिठाऊँ ये राज़ है मेरे लिए )। बहरहाल , उन तमाम शेर-चीतों , गीदड़ -बघीरों को देवनागरी में लाना चाहता हूँ ताकि देवता भी इनका मज़ा ले सकें । एक तस्वीर देखें --


याद उन शामों की अब भी बसी है मेरी नसों में


वो ले के पव्वा करना सफर रोडवेज़ की बसों में

Friday, 10 April 2009

बुरी संगत का शेर




मली से खट्टा नीम्बू , नीम से करेला कड़वा



और जो न पीवे न पीन दे ऐसा यार भड़वा

Wednesday, 8 April 2009

ककहरे का कहर







इस दर पे सीखा है ज़ालिम, मैंने बिलोगिंग का ककहरा !

मना लेन दे ऐ खबीस यहीं मुज्को ,दीवाली ईद, दशहरा !!








चित्र : मेमने पर लाड लुटाते मयखान्वी
( सौजन्य :बाबा बोर्ची स्मृति प्रतिष्ठान )

Friday, 18 April 2008

लिंकिया शेर


उठाई हमने मारुति और जा पहुंचे दगशाई
जो न आए मयखाने में वो यार बड़ा हरजाई

Saturday, 22 March 2008

हिमालयी सितारे !!





किसी ब्लोगान्जना (ब्लॉग जैसे मादक 'अंजन' याने कजरे से सजे हैं नयन' जिसके ) की स्मृति में दो लाईनों की 'एक ब्लोगांजलि' भेंट की और तस्वीर प्रिटी जी की लगा दी के ''दरबार--जालिम '' के प्रणेता सुनील डोगरा 'ज़ालिम' ने चेताया ''ज़रा...संभल के..........''। हमारे क़ाबिल दोस्त ज़ालिम चूंकि एक पत्रकार हैं सो उनका कहा मायने रखता है भाई !चूंकि प्रिटी उनके राज्य की हैं सो उनके कहे का वज़न भी दो मन अढाई सेर और बढ़ जाता है । सो उनको बता दें भाई के वो इससे अन्यथा न लेवें चूंकि प्रिटी के इलाके की यात्रा का चर्चा यहाँ कई दिन से गर्म था और उनकी कोई फोटू हमने यहाँ चेपी न थी, वजह --हम नहीं चाहते थे कि कोई हमसे कहे कि हमने ख़ुद की मशहूरी के लिए एक
फिलमी हस्ती का दामन थामा। सो ये तो प्रिटी जी के चाहने वालों का दबाव था के भाई उनका उनका एक 'मरहबा' फोटो हमने यहाँ चेपा । बाक़ी उनके एक fan हम भी हैं चूंकि हमारे प्रिय हिमालयी इलाके की हैं और उनके अलावा मनीषा कोइराला और डैनी ही हिमालय की वादियों से फिल्मी हस्ती हुए हैं । वैसे ये जान कर हैरत होती है कि जिन प्रदेशों के युवा सबसे सुंदर और स्वस्थ हैं उन्हें ही फ़िल्म उद्योग ने नकारे रखा है चूंकि वो छल कपट और चापलूसी में आगे नहीं हैं और बिना इन खासियतों के तो फिलिम line में गुज़ारा है नहीं। एक बार हमारी एक मित्र डैनी साहब से FM कि खातिर एक interview कर रही थीं । उन्होंने पूछा आपका फ़िल्म नगरी का पहला अनुभव कैसा रहा तो आपने बताया कि पुणे से फ़िल्म अभिनय का डिप्लोमा लेकर जब वो मुम्बई आए तो पता लगा कि फलां फ़िल्म में एक पहाडी आदिवासी नौजवान का रोल है वो उन्हें मिल सकता है और उनका चयन भी हो गया मगर शूटिंग पे पहुंचे तो पाया सुजीत कुमार का make up हो रहा है उनकी आँखें छोटी दिखाने के लिए और रोल तो उन्हें दे दिया गया है !!!यानी एक बना बनाया character और एक्टिंग trained नौजवान सिफारिश के बिना मिला मिलाया रोल खो बैठा । फ़िर उनकी पहली फ़िल्म आई 'धुंध' जिसमे उनके उबलते आक्रोश कि वजह यही अनुभव बना । आपने देखी है ? बढ़िया murder मिस्ट्री है साहब !! बाक़ी फ़िर कभी ! तरुण ने अपने ब्लॉग पर कुछ लोकल video लगाये हैं उन्हें देखें और सोचें की उनमे नाच रहे कलाकारों को कोई mainstream बॉलीवुड director मिल जाए तो ?? हिन्दी सिने जगत का बासी सडा- पन दूर होगा और क्या !

हम न खेलेंगे होली मगर ...................





हम खेलेंगे होली- वोली रहने दे यार छोटू ,
तुम लोग खेलो हम खेंचेंगे तुम्हरा फोटू !

Friday, 21 March 2008

होरी के हुरियारे !!



मेरे दोनों पहाडी बन्धु जोशी एंड तरुण ,
कर रहे कविता ऐसी जो है बहुत करुण।
प्रकृति को बतावें फकत पेड़, पहाड़ -नाले,
हैं भंग की पिनक में गलबहियाँ दोनों डाले ।
जय होली ! सब सस्तों को सब मस्तों को !

Wednesday, 19 March 2008

preity zinta village :एक्सक्लूसिव






मोअज्जिज़ मेम्बरान-ऐ -ब्लोगान हमारे क़ाबिल दोस्त जनाब इष्टदेव सांकृत्यायन ने पूछा है के हम रोह्डू इन
हिमाचल परदेश आखिर करने क्या गए थे ? ये बहोत अहम् सवाल है योर ऑनर चूंकि हम पहले ही बता चुके थे के हम वहां प्रिटी जिंटा का गाँव देखने गए थे !
चूंकि जनाब इष्टदेव एक पत्रकार हैं इसीलिए शक करना उनकी आदत है और उनकी ये आदत बिल्कुल वाजिब है , उनका शक बिल्कुल बा-बुनियाद है । दरअसल हम तो यूं ही आदतन तफरीह की गरज से वहां गए थे और वहीं जाकर हमने ये जाना के सनीमे की मशहूर अदाकारा प्रिटी जिंटा उसी तहसील रोह्डू की हैं जहाँ हम तीन रोज़ से झख मार रहे थे । '' क्यों गुरु क्या प्रिटी जी अब भी यहाँ आती हैं ?" जब मेरे कजिन ने ये सवाल हठ कोटी में वाके ब्रिज गेस्ट हाउस के chowkidaar परमेशरी प्रजापत से पूछा तो उसी ने हमसे कहा '' बचपन में आते होते थे जी , अब तो बड़े आदमी हो गए हैं , हाँ जी उनकी माता जी गाँव पुज्याली में रहते हैं वो जरूर आंदे हैं मंदर मत्था टेकन वास्ते "
तो साहेबान आज हमने आपको सवेरे ही उस मंदर की एक्सक्लूसिव फोटू दिखा दी थीं । वो फोटू जो और किसी ब्लोगिए के पास नहीं हैं । हम आपको और भी सोनी सोनी फोटू दिखाना चाहते हैं , देखते रहिये सस्ता शेर चूंकि चीता भारत से लुप्त हो चुका है और इसीलिए काफ़ी महंगा है।

Sunday, 16 March 2008

खबरदार!!


ब्लूगिस्तान के तमाम बाशिंदों को आज ये मानने में भला क्यों उज्र होगा के सल्तनत - -ब्लूगिस्तान में 'सस्ता शेर' ने आज जो क़ामयाबी , जो तरक्की हासिल की है और एक अहम् सूबे के तौर पे जो मकाम चूमा है , उससे बड़े -ब्बडे ब्लोगमखान रश्क करते हैं ! गवाह है ब्लॉग की बायीं बगल में पैबस्त वो मीटर जो हर घड़ी उन सैलानिओं का हिसाब रखता है जिन्होंनें अपने मुबारक़ कदम इसकी सरज़मीन पे रखे हैंअपनी पुरानी रवायतों के मुताबिक 'सस्ता -शेर' हर सैय्याह का खैर -मक्दम करता है मगर आज आगाह भी कर देना चाहता है ऐसी ताकतों को जो महज़ दिल्क़शी के वास्ते यहाँ तशरीफ़ लाते हैं और बगैर कोई दाद दिए ब्लूगिस्तान की पतली गलियों में खो जाते हैं अपनी बेमुरव्वत शख्सीयत के साए में लिपटे-चिपटे ! शेरों को पसंद करके भी बगैर दाद दिए जाने वालों की खातिर ये ऐलान आज हर खासो - आम सुने :

अंड -बंड प्रचंड धनिया पुदीना लहसन प्याज
दाद दिए बिन जो निकले होवे उसको खाज !!

Thursday, 21 February 2008

मैं और मेरी 'कवीता ' !

यह मेरा कलुषित काव्यकर्म जो आज गर्हित और त्याज्य है/
कल कू ये एक 'वाद' बने ये भी सहज संभाव्य है.!!

इत्यलम अर्थात इत्ता ही भोत है !

Thursday, 31 January 2008

ओये कुर्बान !! ओये लाले दी जान!!



ऐसा तो ब्लौग यारों ना मिलेगा कहीं ढूंढें से भी जहन्नुम में
बडे बडे उस्ताद जहाँ करते हैं शायरी चूतिया सी तरन्नुम में!!

Saturday, 26 January 2008

यौमे जमहूरी ; २६ जनवरी पर.......

नेता लोग को 'पुदीन-हरा ', पब्लिक को हलवा पूरी ,
ऐ वतन तुझको मुबारक फिर से ये यौमे -जमहूरी !!